उत्तराखंड में राज्य कर्मचारियों और पेंशनरों की राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना (SGHS) के अन्तर्गत समस्त प्रकार के रोगों की चिकित्सकीय उपचार को प्रभावी बनाये जाने के लिए गोल्डन कार्ड से संबंधित सुधारों के आदेश सरकार ने जारी कर दिए हैं।

उत्तराखंड में राज्य कर्मचारियों और पेंशनरों की राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना (SGHS) के अन्तर्गत समस्त प्रकार के रोगों की चिकित्सकीय उपचार को प्रभावी बनाये जाने के लिए गोल्डन कार्ड से संबंधित सुधारों के आदेश सरकार ने जारी कर दिए हैं। आयुष्मान भारत / अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना की अम्ब्रेला योजना से पृथक किये जाने के संबंध में उत्तराखंड शासन के सचिव अमित सिंह नेगी की ओर से आदेश जारी कर दिए गए हैं। इस पर 18 सूत्रीय मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी, शिक्षक समन्वय समिति ने राज्य सरकार द्वारा राज्य कर्मियों की गोल्डन कार्ड से सम्बन्धित सुधारों का शासनादेश जारी करने की मांग पूर्ण करने का स्वागत किया। साथ ही समिति की बैठक में अन्य मांगों के शीघ्र निराकरण की मांग दोहराई गई।
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राज्य कर्मियों ने किया स्वागत
समिति के संयोजक मंडल के प्रवक्ता अरुण पांडे ने बताया कि आज की बैठक में राज्य सरकार द्वारा राज्य कर्मियों को कैशलैस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जारी किये गये गोल्डन कार्ड की योजना को आयुष्मान योजना से पृथक कर ओपीडी की भांति भर्ती मरीजों की चिकित्सा भी सीजीएचएस की दरों पर किये जाने का संशोधित शासनादेश जारी कर दिया गया है। इससे समन्वय समिति को मुख्य सचिव उत्तराखंड शासन एवं मुख्यमंत्री की ओर से दिया गया एक आश्वासन पूर्ण हो गया। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व राज्य कर्मियों को ओपीडी में करायी गयी चिकित्सा का भुगतान तो सीजीएचएस दरों पर किया जा रहा था, जबकि भर्ती होने वाले मरीजों की चिकित्सा एम्स की दरों पर की जा रही थी। इससे अधिकांश निजि चिकित्सालय येाजनान्तर्गत गोल्डन कार्ड धारक मरीजों की चिकित्सा करने में आनाकानी कर रहे थे किन्तु इस शासनादेश के बाद अब अवश्य ही राज्य कर्मियों को विभिन्न निजि चिकित्सालयों में कैशलैश चिकित्सा का लाभ मिल सकेगा।
इसी प्रकार पूर्व में योजनान्तर्गत चिकित्सालयों की एक या दो चिकित्सा सुविधा को ही पंजीकृत किया गया था, जबकि समन्वय समिति द्वारा चिकित्सालय की पूरी चिकित्सा व्यवस्था का लाभ कार्मिकों को कैशलैस देने के लिए मांग की जा रही थी, जिसे शानादेश में सम्मिलित किया गया। इससे एक ही चिकित्सालय में विभिन्न प्रकार के चिकित्सा का लाभ कार्मिकों को प्राप्त हो सकेगा। शासनादेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि भविष्य में किसी भी प्रकार के परिवर्तन की आवश्यकता पर मुख्यमंत्री को परिवर्तन हेतु अधिकृत किया गया है।
समन्वय समिति की बैठक में मांग की गयी है कि योजना के सुचारु रूप से संचालन के लिए राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण में एक शिकायत एंव निगरानी प्रकोष्ठ का भी गठन किया जाना आवश्यक है। इस पर शिकायत व समस्या के समाधान के लिए वाटसअप, दूरभाष, एंव ई-मेल इत्यादि के माध्यम से सम्पर्क की व्यवस्था की जानी चाहिए जिससे कि किसी भी प्रकार की समस्या होने पर उसका यथा व्यवस्था तत्काल समाधान किया जा सके। समन्वय समिति द्वारा शासनादेश का विस्तृत अध्ययन एंव उसके प्राविधानों का व्यवहारिक रूप से अनुपालन देखने के उपरान्त पुनः इस सम्बन्ध में आवश्यकतानुसार सुधार हेतु प्रयास किये जायेगे।
बैठक में समन्वय समिति द्वारा प्रस्तुत अन्य मांगों पर भी मुख्य सचिव उत्तराखण्ड शासन एवं मुख्यमंत्री जी द्वारा दिये गये आश्वासन के अनुसार शीघ्रातिशीघ्र कार्यवाही कर मांगो के निराकरण की भी मांग की गयी। आज समन्वय समिति की बैठक में प्रताप पंवार, ठाकुर प्रहलाद सिंह, अरूण पाण्डेय, सुनील कोठारी, शक्ति प्रसाद भट्ट, पूर्णानन्द नौटियाल, एचसी नौटियाल, पंचम बिष्ट, बी0एस0रावत, विक्रम सिंह नेगी, दिनेश गुसांई, संदीप मौर्या, निष्कर्ष सिरोही, नाजिम सिद्विकी, एंव चैधरी ओमबीर सिहं आदि कर्मचारी नेताओं द्वारा शासन व सरकार का धन्यवाद व्यक्त किया गया।
चलाया जा रहा है आंदोलन:
गौरतलब है कि 18 सूत्रीय मांगों को लेकर उत्तराखंड के कर्मचारियों, शिक्षकों और अधाकारियों ने साझा मंच का गठन किया है। उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति के बैनर तले ही सिलसिलेवार आंदोलन किए जा रहे हैं। आंदोलन के तहत अभी तक गेट मीटिंग, जिला स्तरीय धरने, जिला स्तरीय रैली का आयोजन किया गया है। आंदोलन के चौथे चरण में छह अक्टूबर को देहरादून में प्रदेश स्तरीय हुंकार रैली निकाली गई।
समिति के संयोजक मंडल के प्रवक्ता अरुण पांडे ने बताया कि शासन की वेतन विसंगति समिति की बैठक समिति के साथ 29 सितंबर को हुई थी। इसमें समिति के प्रतिनिधिमंडल ने विभिन्न समस्याओं को वेतन विसंगति समिति के अध्यक्ष शत्रुघ्न सिंह के समक्ष बिंदुवार रखा। बैठक में अध्यक्ष की ओर से सार्थक प्रयास का आश्वासन दिया गया। इसके बाद एक अक्टूबर को समन्वय समिति के प्रतिनिधिमंडल की अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी के साथ सचिवालय में मांग पत्र पर विस्तार से वार्ता हुई। इस दौरान अपर मुख्य सचिव ने बिंदुवार चर्चा के दौरान ही कार्मिक विभाग को आवश्यक निर्देश दिए। इस दौरान अपर सचिव ने आंदोलन स्थगित करने का अनुरोध किया था, लेकिन समन्वय समिति ने मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बैठक आयोजित कर समस्त प्रकरणों पर ठोस निर्णय लेने की मांग की। बैठक तय नहीं हुई और इस पर पांच अक्टूबर को हुंकार रैली निकाली गई। कर्मियों ने तय किया था कि 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी। तब सीएम से वार्ता के बाद हड़ताल स्थगित कर दी गई थी। अब हड़ताल 22 नवंबर से करने का निर्णय किया गया। इस निर्णय को 21 नवंबर को सीएम से मुलाकात के बाद स्थगित कर दिया गया।
मांग पत्र:
1-प्रदेश के समस्त राज्य कार्मिकों/शिक्षकों/निगम/निकाय/पुलिस कार्मिकों को पूर्व की भांति 10, 16, व 26 वर्ष की सेवा पर पदोन्नति न होने की दशा में पदोन्नति वेतनमान अनुमन्य किया जाये।
2-राज्य कार्मिको हेतु निर्धारित गोल्डन कार्ड की विसंगतियों का निराकरण करते हुये केन्द्रीय कर्मचारियों की भांति सीजीएचएस की व्यवस्था प्रदेश में लागू की जाय। प्रदेश एवं प्रदेश के बाहर उच्चकोटि के समस्त अस्पतालों को अधिकृत किया जाये, तथा सेवानिवृत्त कार्मिकों से निर्धारित धनराशि में 50 फीसद कटौती कम की जाये।
3-पदोन्नति हेतु पात्रता अवधि में पूर्व की भांति शिथिलीकरण की व्यवस्था बहाल की जाये।
4-प्रदेश में पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू की जाये।
5-मिनिस्टीरियल संवर्ग में कनिष्ठ सहायक के पद की शैक्षिक योग्यता इण्टरमीडिएट के स्थान पर स्नातक की जाये, तथा एक वर्षीय कम्प्यूटर ज्ञान अनिवार्य किया जाये।
6-वैयक्तिक सहायक संवर्ग में पदोन्नति के सोपान बढ़ाते हुये स्टाफिंग पैर्टन के अन्तर्गत ग्रेड वेतन रु0 4800.00 में वरिष्ठ वैयक्तिक अधिकारी का पद सृजित किया जाये।
7-राजकीय वाहन चालकों को ग्रेड वेतन रु0 2400.00 इग्नोर करते हुए स्टाफिंग पैर्टन के अन्तर्गत ग्रेड वेतन रु0 4800.00 तक अनुमन्य किया जाये।
8-चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों को भी वाहन चालकों की भांति स्टाफिंग पैर्टन लागू करते हुए ग्रेड वेतन रु0 4200.00 तक अनुमन्य किया जाये।
9-समस्त अभियन्त्रण विभागों में कनिष्ठ अभियन्ता (प्राविधिक)/संगणक के सेवा प्राविधान एक समान करते हुए इस विसंगति को दूर किया जायें।
10-विभिन्न विभागीय संवर्गो के वेतन विसंगति/स्टापिंग पैर्टड के प्रकरण जो शासन स्तर पर लम्बित हैं, उनका शीघ्र निस्तारण किया जाये।
11-जिन विभागों के ढांचे का पुर्नगठन/एकीकरण शासन स्तर पर किया जाना प्रस्तावित हैं उन विभागों के पूर्व स्वीकृत पदों में कटौती न की जाये, ताकि कार्मिको के पदोंन्नति के अवसर बाधित न हों
12-राज्य सरकार द्वारा लागू एसीपी/एमएसीपी के शासनादेश में उत्पन्न विसंगति को दूर करते हुये पदोन्नति हेतु निर्धारित मापदण्डों के अनुसार सभी लेवल के कार्मिकों के लिये 10 वर्ष के स्थान पर 05 वर्ष की चरित्र पंजिका देखने तथा अति उत्तम के स्थान पर उत्तम की प्रविष्टि को ही आधार मानकर संशोधित आदेश शीघ्र जारी किया जाये।
13-जिन विभागों का पुर्नगठन अभी तक शासन स्तर पर लम्बित है, उन विभागों का शीघ्र पुनर्गठन किया जाये।
14-31 दिसम्बर तथा 30 जून को सेवानिवृत्त होने वाले कार्मिकों को 06 माह की अवधि पूर्ण मानते हुये एक वेतन वृद्धि अनुमन्य कर सेवा निवृत्ति का लाभ प्रदान किया जाये।
15-स्थानान्तरण अधिनियम-2017 में उत्पन्न विसंगतियों का निराकरण किया जाये।
16-राज्य कार्मिकों की भांति निगम/निकाय कार्मिकों को भी समान रूप से समस्त लाभ प्रदान किये जाये।
17-तदर्थ रूप से नियुक्त कार्मिकों की विनियमितिकरण से पूर्वतदर्थ रूप से नियुक्ति की तिथि से सेवाओं को जोड़ते हुये वेतन/सैलेक्शन ग्रेड/ए0सी0पी0/पेंशन आदि समस्त लाभ प्रदान किया जाये।
18-समन्वय समिति से सम्बद्ध समस्त परिसंघों के साथ पूर्व में शासन स्तर पर हुई बैठकों में किये गये समझौते/निर्णयो के अनुरूप शीघ्र शासनादेश जारी कराया जाये।
राज्य की स्वास्थ्य योजना में संशोधित सुधार शासनादेश का स्वागत:
जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ उत्तराखंड के पूर्व महामंत्री राजेंद्र बहुगुणा ने गोल्डन कार्ड स्वास्थ्य योजना के सुधार संशोधित शासनादेश का स्वागत करते हुए कहा कि लम्बे समय से कार्मिक संघों के साथ ही जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ उत्तराखंड इसकी निरन्तर प्रभावी पैरवी सरकार और शासन से करता आ रहा था। उन्होंने कार्मिक स्वास्थ योजना के प्रभावी संचालन, निगरानी एवं क्रियान्वयन हेतु स्वास्थ्य प्राधिकरण में प्रभावी शिकायत एवं निगरानी प्रकोष्ठ गठन के साथ ही प्रदेश में जूनियर हाईस्कूल शिक्षकों के शैक्षिक संरचनात्मक, उच्चीकृत जूनियर हाईस्कूलों ,17140= वेतन अनुमन्यता, त्रुटिपूर्ण पुनः नोशनली वेतन, वेतन विसंगति, सहायक एवं प्रधानाध्यापक को सेवाकाल में तीन पदोन्नति आदि लम्बित न्यायोचित प्रकरणों के प्रभावी निस्तारण की मांग सरकार और शासन से की।
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