ऊर्जा प्रदेश बनने की उत्तराखंड की क्षमता को फिर से खंगालते हुए पुष्कर सिंह धामी मंत्रिमंडल ने महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।
लाइसेंस शुल्क में बड़ी कटौती:
जलविद्युत परियोजनाओं के लिए दो मेगावाट से लेकर 100 मेगावाट से अधिक तीन अलग-अलग नीतियों का एकीकरण कर हिमाचल की भांति नई नीति बनाई गई है। इसमें परियोजना की क्षमता वृद्धि को प्रति मेगावाट निर्धारित लाइसेंस शुल्क में बड़ी कटौती की गई है।
इसे प्रति मेगावाट 25 लाख से घटाकर एक लाख रुपये किया गया है। 25 मेगावाट तक परियोजनाओं से उत्पादित बिजली की अनिवार्य खरीद ऊर्जा निगम करेगा। इसके लिए बिजली टैरिफ उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग करेगा। मंत्रिमंडल ने अन्य महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए 15 नए शहर विकसित करने पर सैद्धांतिक सहमति दी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंगलवार को सचिवालय में मंत्रिमंडल की बैठक में कुल 20 बिंदुओं पर निर्णय लिए गए। साथ में मसूरी में चिंतन शिविर में 2025 तक सशक्त उत्तराखंड बनाने के लिए निर्धारित 25 प्रमुख बिंदुओं पर भी मुहर लगा दी।
मंत्रिमंडल ने जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण में तेजी लाने और पूंजी निवेश को बढ़ावा देने को पुरानी नीतियों में संशोधन कर एकीकृत जलविद्युत नीति को मंजूरी दी। हिमाचल की नीति का अध्ययन कर लगभग उसी अनुरूप उत्तराखंड की नीति तैयार की गई है।
शैलेश बगोली ने मंत्रिमंडल के निर्णयों को ब्रीफ किया:
सचिव मुख्यमंत्री शैलेश बगोली ने मंत्रिमंडल के निर्णयों को ब्रीफ किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में दो मेगावाट से 25 मेगावाट, 25 मेगावाट से 100 मेगावाट और 100 मेगावाट से अधिक क्षमता की जलविद्युत परियोजनाओं के लिए अलग-अलग नीतियां क्रियान्वित की जा रही थीं।
उन्होंने बताया कि राज्य गठन से पहले आवंटित परियोजनाओं के लिए बढ़ी हुई क्षमता पर अब एक लाख रुपये प्रति मेगावाट लाइसेंस शुल्क लिया जाएगा। साथ में उत्तराखंड राज्य बनने के बाद आवंटित परियोजनाओं के लिए विकासकर्त्ता द्वारा दिए गए प्रति मेगावाट प्रीमियम के अनुसार बढ़ी हुई क्षमता पर शुल्क लेने का निर्णय लिया गया है।
परियोजना का निर्माण कर रही संस्था या फर्म किसी कारणवश परियोजना का हस्तांतरण करना चाहती है तो उसे अनुमति मिलेगी। अनुमति से पहले संबंधित प्रस्ताव पर शासन विचार करेगा। जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण के दौरान मिट्टी, खनिज का उपयोग करने और परियोजना क्षेत्र में स्टोन क्रशर स्थापित करने की अनुमति भी दी गई है।
अब परियोजनाओं अनुबंध अवधि को सहमति पत्र पर हस्ताक्षर की तिथि से नहीं, बल्कि निर्धारित वाणिज्यिक उत्पादन की तिथि से 40 वर्ष किया गया है। निवेशकों को राहत देने के लिए वन टाइम एमनेस्टी यानी एक मुश्त आम माफी योजना के अंतर्गत जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण प्रारंभ करने की तिथि और निर्माणाधीन परियोजनाओं की वाणिज्यिक उत्पादन तिथि को बिना किसी विलंब अधिभार के पुनर्निर्धारित किया जा सकेगा।
कैबिनेट बैठक में ये फैसले भी लिए गए
सचिवालय प्रशासन में 90 प्रतिशत पद सीधी भर्ती से भरे जाएंगे।
अब पैरोल की अनुमति डीएम से ही मिल सकेगी। अधिकतम 12 माह की पैरोल की व्यवस्था की जाएगी।
पीडब्ल्यूडी के ढांचे के पुनर्गठन होगा।
सिडकुल की पांच सड़कों को पीडब्ल्यूडी को स्थानांतरित किया जाएगा।
पार्किंग पॉलिसी पर भी कैबिनेट की मुहर लग गई।
पहाड़ में बसों को परमिट टैक्स में राहत बढ़ाकर 75 प्रतिशत की गई।
प्रदेश में 91 आइटीआइ में से 20 संस्थानों को कर्नाटक मॉडल पर उच्चीकृत किया जाएगा।
परिवहन- सिटी बस में मोटरयान कर में शत प्रतिशत छूट दी जाएगी।
परिवहन विभाग की प्रवर्तन कर्मचारी सेवा नियमावली में संशोधन होगा। शत प्रतिशत प्रवर्तन सिपाही के पद सीधी भर्ती से भरे जाएंगे।
राज्य पार्किंग नियमावली प्रख्यापित की गई।
रेलवे की जमीन पर मास्टर प्लान की बाध्यता नहीं रहेगी।
सरकारी और एडेड कॉलेजों में 12वीं तक के छात्रों को निशुल्क किताबें दी जाएंगी।
यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी का नाम कोर यूनिवर्सिटी रखा जाएगा।
लखवाड़ परियोजना में विभाग ने 4 बार टेंडर निकले थे। एक ही टेंडर आया, उसे खोलने की अनुमति दी गई।
महासू देवता और अल्मोड़ा के जागेश्वर धाम का मास्टर प्लान बनेगा।
दिव्यांगों को स्टाम्प ड्यूटी में 25 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।
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